Friday, May 9, 2008

तत्वादी दृष्टिकोण?

अपने ब्लॉग को लेकर बहुत उत्साहित हूँ । और बहुत स्वाभाविक है की मैंने यह कुछ दोस्तों को भी बताया। उन में से एक मेरी स्चूल की एक सहेली भी थी। हमने मेरे हिन्दी ब्लॉग पर लगभग आधे घंटे तक चर्चा की। वह समझ नहीं सकी की मैं क्यों हिन्दी में ब्लॉग लिखना चाहती हूँ और अगर चाहती हूँ तोह उस में क्या बडी बात है ! उसने एक महत्वपूर्ण सवाल पूछा जो मैं बाकी पाठकोंको भी स्पस्थ करना चाहूँगी -मेरा हिन्दी में लिखने का कोई मूल तत्वादी कराक्रम नहीं है। मैं हिन्दी में ब्लॉग लिखने और पढने के अनुभव का आनंद लेना चाहती हूँ - और आशा है की बाकी पाठक भी यही महसूस करेंगे। और यह भी आशा करती हूँ की मैं हिंदीब्लॉग के ज़रिये हिंदी साहित्य के बारे में और जानकारी प्राप्त कर सकूंगी। बदकिस्मती से मेरी सहेली मेरे ब्लॉग को पढने में असमर्थ है - दस साल निरंतर हिन्दी पढने के बावजूद वह आज की तारीख में हिन्दी लिपि को न पहचानती है और ना पढ़ सकती है !

No comments: